श्रीअरविंद सोसाइटी, राजस्थान
निराशा बेतुका या असंगत है तथा आत्महत्या बिलकुल अनुचित है । फिर भी, मनुष्य डगमगा सकता है परन्तु वह यदि भागवत कृपा की अभीप्सा करता है तब उसे वह प्राप्त होगी और अन्त में अन्त तक मार्ग दर्शन करेगी । - श्रीअरविन्द
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